छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या का वितरण
;क्पेजतपइनजपवद व िक्पेंइसमक च्वचनसंजपवद पद ब्ीींजजपेहंतीद्ध
अनुसुइया बघेल
प्रोफेसर, भूगोल अध्ययनशालाए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर
सार-संक्षेप
प्रस्तुत शोध पत्र का उदृेश्य छत्तीसगढ़ राज्य में निःशक्त जनसंख्या को ज्ञात करना है । यह भारतीय जनगणना 2001 पर आधारित है । राज्य में निःशक्त जनसंख्या 20.1 प्रति हजार है । निःशक्त जनसंख्या पुरुषों (27.9 प्रति हजार) से महिलाओं (18.1 प्रति हजार) में दो-तिहाई है । यह अनुपात ग्रामीण (20.7 प्रति हजार) से नगरीय (17.9 प्रति हजार) क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम है । छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या सबसे अधिक रायपुर जिले में 23.7 प्रति हजार और सबसे कम जशपुर जिले में 15.3 प्रति हजार है । निःशक्त जनसंख्या जशपुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोरबा, कोरिया और महासमुंद छह जिलों में 18.0 प्रति हजार से कम है । जबकि रायपुर, कांकेर एवं दुर्ग तीन जिलों में निःशक्त जनसंख्या 22.0 प्रति हजार से अधिक है । शेष छह जिलों - सरगुजा, रायगढ़, चाॅंपा-जांजगीर, बिलासपुर, कवर्धा और राजनांदगांव जिलों में निःशक्त जनसंख्या 18.0 से 22.0 प्रति हजार है । निःशक्त जनसंख्या अनुसूचित जातियों (24.1 प्रति हजार) से अनुसूचित जनजातियों (17.8 प्रति हजार) में अपेक्षाकृत कम है । छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या सबसे अधिक देखने (7.7 प्रति हजार) से संबंधित है । 7.3 प्रति हजार निःशक्त जनसंख्या चलने-फिरने में असमर्थ है । छत्तीसगढ़ में 1.5 प्रति हजार निःशक्त जनसंख्या बोलने से संबंधित है । 1.6 प्रति हजार जनसंख्या सुनने में निःशक्त है । उल्लेखनीय है कि 2.1 प्रति हजार निःशक्त जनसंख्या मानसिक है । निःशक्त जनसंख्या निरक्षर (22.6 प्रति हजार) से साक्षर (18.6 प्रति हजार) जनसंख्या में अपेक्षाकृत कम है । इसी तरह कृषकों (15.0 प्रति हजार) से कृषि श्रमिकों (14.3 प्रति हजार) में निःशक्त जनसंख्या कम है ।
ज्ञम्ल् ॅव्त्क्ैरू निःशक्त, मानसिक, वयोवृद्ध, साक्षर ।
प्रस्तावना
प्रत्येक समाज में एक ऐसा भाग होता है जो मानसिक या शारीरिक असक्तता का परिणाम होता है जो जन्मजात ;व्दहमदजपंसद्ध या उत्पन्न किया गया ;।बुनपतमकद्ध या बढती उम्र का परिणाम ;च्तवबमेे व िंहमपदहद्ध होता है । शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं के कोशिशों के बावजूद निःशक्त जनसंख्या की दशा दयनीय है । उनकी अवस्था सुधार हेतु बहुत कुछ करना आवष्यक है । छत्तीसगढ़ में न केवल इस भाग के चिन्हन आवश्यक है बल्कि इस भाग पर विशेष ध्यान देकर उनकी दशा सुधार एवं इन्हें सम्मानपूर्वक तथा परिपूर्ण जीवन जीने का अवसर देना अति आवश्यक है । असक्तता प्रभावित जन समूह की गणना अति कठिन कार्य है, यदि उसे सूक्ष्मता से न किया जाय । इनको अपने अंर्तनिहित कमजोरियों के बावजूद सर्वे तथा जनगणना विभाग ने गणना का कार्य स्वीकार किया है, जो कि एक चुनौतीपूर्ण कार्य है ।
जनगणना विभाग ने प्रवासी एवं गृहविहीन व्यक्ति की भी गणना की है जो कि बहुधा छोड़ दिया जाता है । इस विभाग की विशेषता यह है कि जिलावार ऐसे आबादी के अंाकड़े प्रस्तुत करती है जो कि विकेन्द्रीत प्रयोजना के लिए आवष्यक है । अशक्तता पीड़ित व्यक्ति की दशा अक्सर पड़ोसियों से छुपाया जाता है जो उनके सामाजिक कलंक का कारण बनती है और उन्हें सामान्य जीवनयापन से वंचित करती है । इससे अशक्त व्यक्ति दया का पात्र बनकर रह जाता है और सामान्य जीवन नहीं जी पाता । यहाॅं अतिरिक्त कमजोरी यह है कि अशक्तता पर कोई प्रखर प्रचार एवं जनसामान्य के बीच जागृति का न होना है । ऐसी अवस्था में गैर सामाजिक
संस्थाओं का नगण्य सहयोग आकड़ों के संग्रहण की प्रक्रिया को बाधित करती है । सन् 1991 के भारतीय जनगणना विभाग ने अशक्तता पर कोई प्रचार नहीं किया है ।
समाज के इस भाग के भलाई के लिए एन.जी.ओ. संगठन के सतत् प्रयास से 2001 की जनगणना में निःशक्तता को पारिवारिक सूची में शामिल किया गया है । निःशक्तता का प्रश्न जनगणना अनुसूची में शामिल होने से एन.जी.ओ. संगठनों ने अपने सूचना जाल के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सूचना संग्रहण के लिए जाना प्रारंभ कर दिया, ताकि देश के निःशक्त जनसंख्या में कमी दर्ज न हो कुछ एन.जी.ओ. संगठनों ने इनके भलाई के लिए विशेष योगदान दिया है । इसके तहत इन्होंने प्रायवेट टेलिविजन चैनलों में विडियो रिपोर्ट द्वारा लोगों को अपने आसपास स्थित निःशक्ततों की जानकारी देने के लिए उत्साहित किया । इसके अतिरिक्त श्राष्ट्रीय निःशक्त रोजगार प्रोत्साहन केन्द्रश् ने दिल्ली, बंबई , कलकत्ता और चेन्नई जैसे शहरों में कार्यशाला आयोजित किया । ऐसी कार्यशालाओं में एन.जी.ओ. के प्रतिनिधि तथा जनगणना अधिकारी मौजूद थे और उन्होंने लोगों के बीच निःशक्त जनसंख्या में जागृति पैदा करने के लिए तथा उन्हें जनगणना अनुसूची में निशक्तता संबंधी प्रश्नों को शामिल करने के लिए आग्रह किया जिसमें इन प्रश्नों का उत्तर अपेक्षित हो । गैरशासकीय संस्थाओं अथवा सामाजिक न्याय और रोजगार, नियोजन और योजना क्रियान्वयन विभाग सम्पूर्ण देश में निःशक्त जनसंख्या के कल्याण के लिए कार्य कर रहे है । निःशक्त जनसंख्या कानून ;च्मतेवदे ूपजी क्पेंइपसपजपमेद्ध कानून 1995, 07.02.1996 को लागू हुआ ।
अध्ययन के उदृेश्य
प्रस्तुत शोध पत्र के उदृेश्य निम्नलिखित हैं:-
1. छत्तीसगढ़ राज्य में निःशक्त जनसंख्या को ज्ञात करना ।
2. राज्य में निःशक्त जनसंख्या के स्थानिक प्रतिरुप का विश्लेषण करना ।
3. निःशक्त जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले जनाकिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक कारकों की व्याख्या ।
4. शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं के द्वारा निःशक्तता पर प्रचार-प्रसार की समीक्षा ।
अध्ययन क्षेत्र
नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य का गठन भारत के 26 वें राज्य के रुप में 1 नवम्बर 2000 को हुआ । क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में प्रदेश का स्थान 11वाॅं तथा जनसंख्या की दृष्टि से 17वाॅं स्थान है । छत्तीसगढ़ 17ह्.46ष् से 20ह् .6ष् उत्तर अंक्षाश तथा 80ह् .15ष् से 84ह् .24ष् पूर्व देशांश के मध्य 1,35, 194 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में विस्तृत है । 2001 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या 20,79,59,56 है । 0 से 6 वर्ष की जनसंख्या 16.7ः है । प्रदेश में जनसंख्या का घनत्व 154 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है । 1991-2001 के दशक में राज्य की जनसंख्या में 18.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई । राज्य की 79.1ः जनसंख्या गाॅंव में निवास करती है । शेष 20.1ः जनसंख्या 84 नगरों में निवासरत है । राज्य की 12.2ः जनसंख्या अनुसूचित जाति और 31.1ः जनसंख्या अनूसूचित जनजातियों की है । राज्य की 54.1 प्रतिशत जनसंख्या साक्षर है । साक्षरता का प्रतिशत पुरुषों में 64.8ः तथा महिलाओं में 42.6ः है ।
आंकड़ो के स्रोत एवं विधितंत्र
निःशक्तता के आंकड़े भारतीय जनगणना में 1872 से एकत्रित किया गया है और 1931 तक यह आंकड़े एकत्रित किये गये । किन्तु 1941 से ये आंकड़े समाप्त कर दिये गये । 1931 से 50 वर्षो के बाद 1981 की जनगणना में निःशक्तता के आंकड़े पुनः एकत्रित किये गये । 1981 में निःशक्तता का अंर्तराष्ट्रीय वर्ष ;प्दजमतदंजपवदंस ल्मंत वित जीम क्पेंइसमकद्ध मनाया गया जिसके कारण सम्पूर्ण विश्व में निःशक्तता के आंकड़े जनगणना के द्वारा एकत्रित किये गये । भारत इसका अपवाद नहीं था । 1991 में निःशक्तता के आंकड़े फिर से एक़ित्रत नहीं किया गया किन्तु 2001 में ये आंकड़े पुनः एकत्रित किये गये ।
2001 की जनगणना में निःशक्तता की पाॅंच श्रेणियाॅं - देखने में, बोलने में, सुनने में, चलने-फिरने और मानसिक रुप से थी । जनगणना 2011 में मानसिक रुप से निःशक्त जनसंख्या को दो श्रेणियों-मानसिक रुप से पिछड़ा ;डमदजंस त्मजंतकंजपवदद्ध तथा मानसिक रोग ;डमदजंस पससदमेेद्ध में बाॅंटा गया । साथ ही दो नई श्रेणी -कोई अन्य और बहुल निःशक्तता को भी शामिल किया गया । अविभाजित भारत में 1881 से 1931 तक की जनगणना में निःशक्त जनसंख्या को चार वर्गो में रखा गया है ।
1. पागल ;प्देंदपजलद्ध
2. गंूंगा-बहरा ;क्मं िउनजमदमेेद्ध
3. अंधा ;ठसपदकदमेेद्ध
4. कोढ़ ;स्मचतवेलद्ध
निःशक्त जनसंख्या सम्पूर्ण भारत में 1881 में 9,37,063 एवं 1931 में 10,30,678 थी जो कुल जनसंख्या का क्रमशः 0.37ः एवं 0.31ः है । कुल निःशक्त जनसंख्या में से आधे से अधिक (54.9ः) देखने से संबंधित है तथा बोलने से संबंधित निःशक्तता (21.1ः) का द्वितीय स्थान है । 1931 में सम्पूर्ण भारत में कुल पुरुषों की जनसंख्या का 13.5ः कोढ़ से प्रभावित थे जबकि 11.0ः जनसंख्या में पागलपन / भूलने की बीमारी थी । 1881 से 1931 के मध्य कोढ़ एवं देखने में निःशक्त जनसंख्या में कमी आयी है जबकि पागल/भूलने की बीमारी में वृद्धि हुई है । बोलने में निःशक्त जनसंख्या के प्रतिशत में परिवर्तन हीं हुआ ।
यह अध्ययन 2001 की जनगणना पर आधारित है । निःशक्त जनसंख्या को 5 श्रेणियों में रखा गया है ।
1. देखने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद ेममपदहद्ध
2. सुनने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद ीमंतपदहद्ध
3. बोलने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद ेचममबीद्ध
4. चलने-फिरने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद उवअमउमदजद्ध
5. मानसिक निःशक्त ;डमदजंस क्पेंइपसपजलद्ध
इन पाॅंचों श्रेणियों के आंकड़े पुरुष एवं महिला, ग्रामीण एवं नगरीय, साक्षर एवं निरक्षर, कृषक एवं कृषि श्रमिक के अनुसार उपलब्ध है । इस सभी आंकड़ों को प्रति हजार कुल जनसंख्या पर जिले अनुसार विश्लेषण किया गया हैं ।
देखने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद ेममपदहद्ध
;पद्ध जो व्यक्ति देख नहीं सकता (प्रकाश का आभास न हो ) ।
;पपद्ध चश्में की सहायता से धुंधला ;ठसनततमकद्ध दिखाई दे तो वह व्यक्ति देखने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
;पपपद्ध यदि एक आॅख से पूरा दिखाई दे तो वह व्यक्ति निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
;पअद्ध यदि किसी व्यक्ति को धुंधला दिखाई देता है लेकिन जाॅच नहीं कराया है, भले ही चश्में से वह सुधार ;प्उचतवअमद्ध ;60ध्600.20ध्200द्ध कर सकता है, निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
बोलने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद ैचममबीद्ध
;पद्ध वह व्यक्ति जो गूंगा ;क्नउइद्ध है, बोलने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगी ।
;पपद्ध जिस व्यक्ति की बात सुनने वालों को समझ में नहीं आता है , बोलने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
;पपपद्ध तीन साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह प्रश्न लागू नहीं होता है ।
;पअद्ध जो व्यक्ति हकलाता ;ैजंउउमतद्ध है वह बोलने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल नहीं होगा ।
सुनने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद भ्मंतपदहद्ध
;पद्ध जो व्यक्ति कुछ भी नहीं सुन सकता अथवा केवल ऊँंची आवाज को सुनता है्र ,बहरा ;कमंद्धि कहलाता है ।
;पपद्ध जो व्यक्ति सुनने की मशीन ;ीमंतपदह.ंपकद्ध के सहायता से सुनता है,वह व्यक्ति सुनने में निःशक्त कहलाता है ।
;पपपद्ध यदि व्यक्ति एक कान से सुन नहीं सकता किन्तु दूसरा कान सामान्य रूप से कार्य करता है तो व्यक्ति सुनने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
चलने-फिरने में निःशक्त ;क्पेंइपसपजल पद डवअमउमदजद्ध
;पद्ध जिस व्यक्ति में अंग का अभाव हो ;ब्तपचचसमकद्ध या उस अंग के उपयोग में असमर्थ हो, वह व्यक्ति चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
;पपद्ध उंगली या अंगूठा के नही होने से चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या में व्यक्ति शामिल नही होगा ।
;पपपद्ध सभी उंगलियाॅं या अंगूठा के अभाव में व्यक्ति चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
;पअद्ध जो व्यक्ति बिना किसी व्यक्ति या लकड़ी ;ैजपबाद्ध के स्वयं नहीं चल सकता उसे चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या में शामिल करेंगे ।
;अद्ध इसी तरह जो व्यक्ति चलने या आसपास की चीजों को उठाने में अथवा पकड़ने में समर्थ नहीं हो उसे निःशक्त जनसंख्या में शामिल करेंगे ।
;अपद्ध यदि कोई व्यक्ति वात ;।तजीतपजपेद्ध के कारण चलने में लगातार समर्थ नही है तो वह व्यक्ति निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
मानसिक निःशक्तता ;डमदजंस क्पेंइपसपजलद्ध
;पद्ध एक व्यक्ति जिसमें अपने उम्र के अनुसार समझ की कमी हो, वह मानसिक निःशक्त जनसंख्या में शामिल होगा ।
;पपद्ध इसका मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने अध्यापन सामग्री को उम्र के अनुसार समझ नहीं पाता है और वह गुणात्मक परीक्षा में फेल हो जाता है तोे मानसिक रुप से निःशक्त जनसंख्या में शामिल नहीं होगा ।
;पपपद्ध मानसिक विक्षिप्त और असामान्य व्यक्ति को मानसिक रुप से निःशक्त जनसंख्या में शामिल करेंगे ।
;पअद्ध मानसिक रोगी अपने स्वयं के कार्यो के लिए परिवार के सदस्यों पर निर्भर करते हैं ।
;अद्ध यदि परिवार के सदस्य परिवार के किसी व्यक्ति के मानसिक समस्या के बारे में बताया हो तो उसे मानसिक रुप से निःशक्त जनसंख्या में शामिल करेंगे ।
यदि व्यक्ति में उपरोक्त पाॅंच में से दो या दो से अधिक प्रकार की निःशक्तता है तो केवल एक ही प्रकार को रिकार्ड किया जायेगा । यह उत्तरदाता / परिवार के सदस्य निश्चित करते है कि उसे किस प्रकार के निःशक्तता में रखा जाय । इसी तरह अस्थायी निःशक्तता को निःशक्त जनसंख्या नहीं कहा जायेगा ।
छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या
छत्तीसगढ़ में कुल निःशक्त जनसंख्या में से 38.2ः देखने में, 36.2ः चलने-फिरने में, 10.2ः मानसिक, 8.0ः बोलने में एवं 8.0ः सुनने में निशक्त है । जबकि सम्पूर्ण भारत में यह प्रतिशत क्रमशः 48.8ः, 27.7ः 10.3ः, 7.5ः और 5.6ः है । यद्यपि छत्तीसगढ़ में भारत की तुलना में सुनने में निःशक्त जनसंख्या कम है किन्तु शेष चारों प्रकार की निःशक्तता छत्तीसगढ़ में अधिक है ।
सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या 20.1 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या पुरूषों (27.9 प्रति हजार) से महिलाओं (18.1 प्रति हजार) में दो-तिहाई है। यह प्रतिशत ग्रामीण (20.7 प्रति हजार) क्षेत्र से नगरीय (17.9 प्रति हजार) क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम है। छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या सबसे अधिक रायपुर जिले में 23.7 प्रति हजार और सबसे कम जशपुर जिले में 15.3 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या जशपुर (15.3 प्रति हजार), दंतेवाड़ा (16.1 प्रति हजार), बस्तर (16.7 प्रति हजार), कोरबा (16.9 प्रति हजार), कोरिया (17.6 प्रति हजार) और महासमुन्द (17.8 प्रति हजार) जिलों में 18.0 प्रति हजार से कम है, जबकि रायपुर (23.7 प्रति हजार), कांकेर एवं दुर्ग (22.8 प्रति हजार) जिलों में निःशक्त जनसंख्या 22.0 प्रति हजार से अधिक है। शेष छह जिलों - सरगुजा (18.4 प्रति हजार), रायगढ़ (18.5 प्रति हजार), जांजगीर-चाँपा (18.6 प्रति हजार), बिलासपुर (20.7 प्रति हजार), कवर्धा (21.5 प्रति हजार) एवं राजनांदगांव (21.8 प्रति हजार) जिलों में 18.0 से 22.0 प्रति हजार है (मानचित्र)। निःशक्त जनसंख्या अनुसूचित जातियों (24.1 प्रति हजार) से अनुसूचित जनजातियों (17.8 प्रति हजार) में अपेक्षाकृत कम है। छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक निःशक्त जनसंख्या देखने (7.7 प्रति हजार) से संबंधित है। तत्पश्चात् 7.3 प्रति हजार निःशक्त जनसंख्या चलने-फिरने में असमर्थ है। 1.5 प्रति हजार निःशक्त जनसंख्या बोलने में असमर्थ हैं। 1.6 प्रति हजार निःशक्त जनसंख्या सुनने में असमर्थ है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में 2.1 प्रति हजार जनसंख्या मानसिक रोग से ग्रसित है।
निःशक्त जनसंख्या निरक्षर (22.6 प्रति हजार) से साक्षर जनसंख्या (18.6 प्रति हजार), में अपेक्षाकृत कम है। इसी तरह कृषकों (15.0 प्रति हजार) से कृषि श्रमिकों (14.3 प्रति हजार) में निःशक्त जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है। कृषकों और कृषि श्रमिकों से गृह उद्योग (17.9 प्रति हजार) और अन्य कर्मियों (16.8 प्रति हजार) में निःशक्त जनसंख्या अधिक है।
आँखों से संबंधित निःशक्तता सबसे अधिक रायपुर जिले में 10.4 प्रति हजार है। यह निःशक्तता कांकेर जिले में 9.4, दुर्ग जिले में 8.9, धमतरी जिले में 8.8 एवं राजनांदगांव जिले में 8.2 प्रति हजार है। बोलने से संबंधित निःशक्तता कांकेर जिले में ही सर्वाधिक 4.7 प्रति हजार है। शेष 15 जिलों में यह 1.5 प्रति हजार से कम है। कानों से संबंधित निःशक्तता कांकेर जिले में ही सर्वाधिक 2.4 प्रति हजार है। यह निःशक्तता राजनांदगांव जिले में 2.0 प्रति हजार है। शेष 14 जिलों में यह निःशक्तता 2.0 प्रति हजार से कम है जो छत्तीसगढ़ के मध्य मैदानी क्षेत्र के अन्तर्गत है। चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता छत्तीसगढ़ के उत्तरी भागों में अधिक है। यह निःशक्तता सबसे अधिक कवर्धा जिले में 9.6 प्रति हजार है। यह निःशक्तता जांजगीर-चांपा जिले में 8.7, बिलासपुर जिले में 8.5, दुर्ग जिले में 8.4, रायपुर जिले मे 8.2 और राजनांदगांव जिले में 8.0 प्रति हजार है। मानसिक निःशक्तता का अनुपात मैदानी भागों मे अधिक है। यह निःशक्तता सर्वाधिक कांकेर जिले में 2.7 प्रति हजार है। यह निःशक्तता धमतरी और दुर्ग जिले में 2.4, रायपुर, राजनांदगांव और रायगढ़ जिले में 2.3 एवं महासमुन्द जिले में 2.1 प्रति हजार है।
ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में निःशक्त जनसंख्यारू
ग्रामीण एवं नगरीय दोनों क्षेत्रों में आँख संबंधी निःशक्तता सर्वाधिक है। यह निःशक्तता ग्रामीण क्षेत्रों में 7.8 और नगरीय क्षेत्रों में 7.3 प्रति हजार है। चलने-फिरने से संबंधित अपंगता का द्वितीय स्थान है । यह ग्रामीण क्षेत्रों में 7.5 और नगरीय क्षेत्रों में 6.2 प्रति हजार है। मानसिक रोगी ग्रामीण (2.1 प्रति हजार) से नगरीय क्षेत्र (2.2 प्रति हजार) में अधिक है। बोलने से संबंधित निःशक्तता ग्रामीण क्षेत्र में 1.5 और नगरीय क्षेत्र में 1.2 प्रति हजार है। उल्लेखनीय है कि सुनने से संबंधित निःशक्तता ग्रामीण (1.8 प्रति हजार) से नगरीय क्षेत्रों में आधा (0.9 प्रति हजार) है।
ज्ंइसमरू1ए ब्ीींजजपेहंती रूक्पेजतपबजूपेम क्पेंइसमक च्वचनसंजपवद इल ैमग ंदक त्मेपकमदबम ए2001
क्पेजपबजे च्मत ज्ीवनेंदक च्वचनसंजपवद
त्नतंस न्तइंद डंसम थ्मउंसम ज्वजंस
ज्ञवतमं 18ण्6 15ण्2 19ण्3 15ण्5 17ण्6
ैनतहनरं 18ण्4 19 20ण्5 16ण्3 18ण्4
श्रंेीचनत 15ण्2 17ण्3 17ण्2 13ण्3 15ण्3
त्ंपहंती 18ण्8 17 20ण्9 16ण्2 18ण्5
ज्ञवतइं 17ण्8 15ण्2 18ण्6 15ण्1 16ण्9
ब्ींउचं.श्रंदरहपत 18ण्7 18 20ण्8 16ण्5 18ण्6
ठपसंेचनत 21ण्7 17ण्6 23ण्1 18ण्2 20ण्7
ज्ञंूंतकीं 21ण्9 16ण्5 24ण्2 18ण्9 21ण्5
त्ंरदंदकहंवद 22ण्3 19ण्8 24ण्2 19ण्5 21ण्8
क्नतह 24ण्4 20 24ण्9 20ण्5 22ण्8
त्ंपचनत 26ण्7 16ण्8 25ण्3 22ण्21 23ण्7
डंींेंउनदक 18ण्2 14ण्8 19ण्1 16ण्6 17ण्8
क्ींउजंतप 22ण्8 18ण्8 24ण्1 20ण्5 22ण्3
ज्ञंदामत 22ण्9 21ण्6 24 21ण्6 22ण्8
ठंेजंत 16ण्8 15ण्3 18ण्4 15 16ण्7
क्ंदजमूंतं 15ण्4 24ण्7 17ण्5 14ण्7 16ण्1
ज्वजंस 20ण्7 17ण्9 27ण्9 18ण्1 20ण्1
छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या 20.1 प्रति हजार है किन्तु यह ग्रामीण क्षेत्र (20.7 प्रति हजार) से नगरीय क्षेत्र (17.9 प्रति हजार) अपेक्षाकृत कम है । छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में निःशक्त जनसंख्या रायपुर जिले में 26.7 सर्वाधिक और सबसे कम जशपुर जिले में यह 15.2 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में रायपुर जिले में 26.7 प्रति हजार, दुर्ग जिले में 24.4 प्रति हजार, कांकेर जिले में 22.9 प्रति हजार, धमतरी जिले में 22.8 प्रति हजार, राजनांदगांव जिले में 22.3 प्रति हजार, कवर्धा जिले में 21.9 और बिलासपुर जिले में 21.7 प्रति हजार है। इसके विपरीत जशपुर जिले में 15.2 प्रति हजार, धमतरी जिले में 15.4 प्रति हजार, बस्तर जिले में 16.8 प्रति हजार, कोरबा जिले में 17.8 प्रति हजार, महासमुन्द जिले में 18.2 प्रति हजार, सरगुजा जिले में 18.4 प्रति हजार, कोरिया जिले में 18.6 प्रति हजार, जांजगीर-चांपा जिले में 18.7 प्रति हजार और रायगढ़ जिले में 18.8 प्रति हजार है।
ज्ंइसमरू2ए ब्ीींजजपेहंती रू क्पेंइसमक च्वचनसंजपवद 2001
ज्लचम व िक्पेंइपसपजल च्मत ज्ीवनेंदक च्वचनसंजपवद
ज्वजंस डंसम थ्मउंसम त्नतंस न्तइंद
प्द ैममपदह 7ण्7 8 7ण्3 7ण्8 7ण्3
प्द ैचममबी 1ण्5 1ण्6 1ण्3 1ण्5 1ण्2
प्द भ्मंतपदह 1ण्6 1ण्8 1ण्5 1ण्8 0ण्9
प्द डवअमउमदज 7ण्3 8ण्5 6 7ण्5 6ण्2
डमदजमस 2ण्1 2ण्3 1ण्9 2ण्1 2ण्2
ज्वजंस 20ण्1 27ण्9 18ण्1 20ण्7 17ण्9
नगरीय क्षे़त्रों में निःशक्त जनसंख्या सर्वाधिक दंतेवाड़ा जिले में 24.7 प्रति हजार और सबसे कम महासमुन्द जिले में 14.8 प्रति हजार है। यह दर कोरिया और कोरबा जिले में 15.2, बस्तर जिले में 15.3, कवर्धा जिले में 16.5, रायपुर जिले में 16.8, रायगढ़ जिले में 17.0, जशपुर जिले में 17.3, और बिलासपुर जिले में 17.6 प्रति हजार है। इसके विपरीत जांजगीर-चांपा जिले में 18.0 प्रति हजार, धमतरी जिले में 18.8 प्रति हजार, सरगुजा जिले में 19.0, राजनांदगांव जिले में 19.8 प्रति हजार और कांकेर जिले में 21.6 प्रति हजार है। सरगुजा और दंतेवाड़ा इन दोनों जिलों में ग्रामीण से नगरीय जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या अधिक है। निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में सरगुजा जिले में 18.4 और दंतेवाड़ा जिले में 15.4 प्रति हजार है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में यह क्रमशः 19.0 और 24.7 प्रति हजार है। ग्रामीण एवं नगरीय निःशक्त जनसंख्या में सर्वाधिक अंतर दंतेवाड़ा जिले में 11.3 प्रति हजार है जबकि सबसे कम अंतर सरगुजा जिले में 0.2 प्रति हजार है। इसी तरह यह अंतर रायपुर जिले में भी 10.1 प्रति हजार है।
निःशक्त जनसंख्या में ग्रामीण-नगरीय अंतर 2.8 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या में ग्रामीण नगरीय अंतर रायपुर जिले में सर्वाधिक 9.9 प्रति हजार और सबसे कम दुर्ग जिले में 0.4 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या में ग्रामीण-नगरीय अन्तर दंतेवाड़ा जिला में 9.3 प्रति हजार है। ग्रामीण निःशक्त जनसंख्या में ग्रामीण-नगरीय अन्तर सरगुजा (0.6) और जांजगीर-चांपा (0.7) जिलों में 1.0 प्रति हजार से भी कम है। इसी तरह रायगढ़ (1.8), कांकेर (1.3) और बस्तर (1.5) जिलों में यह अन्तर 1.0 से 2.0 प्रति हजार है।
पुरूष एवं महिलाओं में निःशक्त जनसंख्यारू
छत्तीसगढ़ में पुरुष एवं महिलाओं में निःशक्त जनसंख्या अलग-अलग है । निःशक्त जनसंख्या पुरुषों में 27.9 प्रति हजार और महिलाओं में 18.1 प्रति हजार है । निःशक्त जनसंख्या पुरूषों में सबसे अधिक रायपुर जिले में 30.5 प्रति हजार और सबसे कम दंतेवाड़ा जिले में 17.5 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या पुरूषों में रायपुर जिले के अन्तर्गत 25.3 प्रति हजार, दुर्ग जिले में 24.9 प्रति हजार, कवर्धा और राजनांदगांव जिले में 24.2 प्रति हजार, धमतरी जिले में 24.1 प्रति हजार और बिलासपुर जिले में 23.1 प्रति हजार है। इसके विपरीत बिलासपुर जिले में 18.4, कोरबा जिले में 18.6 एवं महासमुन्द जिले में 19.1 प्रति हजार है।
महिलाओं में निःशक्त जनसंख्या रायपुर जिले में ही सर्वाधिक 22.1 प्रति हजार है। इसी तरह कांकेर जिले में निःशक्त जनसंख्या महिलाओं में 21.6 प्रति हजार, दुर्ग और धमतरी जिले में 20.5 प्रति हजार है। इसके विपरीत जशपुर जिले में यह सबसे कम 13.3 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या कोरबा जिले में 15.1, बिलासपुर जिले में 15.0, दंतेवाड़ा जिले में 14.7 एवं कोरिया जिले में 15.5 प्रति हजार है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में महिलाओं से पुरूषों में निःशक्त जनसंख्या अधिक है।
छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या में पुरूष-स्त्री अन्तर 9.8 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या में पुरूष-स्त्री अन्तर सर्वाधिक कवर्धा जिले में 5.3 प्रति हजार और सबसे कम कांकेर जिले में 2.4 प्रति हजार है। बिलासपुर (4.9) और जशपुर (4.7) जिलों में भी निःशक्त जनसंख्या में पुरूष-महिला अन्तर अधिक है। महासमुन्द (2.5) और दंतेवाड़ा (2.8) जिलों में यह अन्तर 3.0 प्रति हजार से कम है।
निःशक्त जनसंख्या में अन्तर पुरूष एवं स्त्री जनसंख्या में भी मिलता है। नेत्र से संबंधित निःशक्तता पुरूषों में 8.0 और स्त्रियों में 7.3 प्रति हजार है। चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता पुरूषों में 8.5 और स्त्रियों में 6.0 प्रति हजार है। मानसिक रोगी पुरूषों में 2.3 प्रति हजार और स्त्रियों में 1.9 प्रति हजार है।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समूहों में निःशक्त जनसंख्या
2001 की जनगणना के अनुसार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या 20.1 प्रति हजार है । निःशक्त जनसंख्या अनुसूचित जाति में 24.1 प्रति और अनुसूचित जनजाति में 17.8 प्रति हजार है । अनुसूचित जाति समूहों में सर्वाधिक निःशक्तता चलने-फिरने से संबंधित (9.6 प्रति हजार) है जबकि अनुसूचित जनजातियों में सर्वाधिक निःशक्तता आँखों (7.1 प्रति हजार) से संबंधित है। अनुसूचित जाति समूहों में आँखों से संबंधित निःशक्तता 8.6 प्रति हजार और अनुसूचित जाति समूहों में चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता 6.1 प्रति हजार है। उल्लेखनीय है कि सभी प्रकार की निःशक्तता कुल जनसंख्या से अनुसूचित जाति समूहों में अधिक और अनुसूचित जनजाति समूहों में कम है। अनुसूचित जाति समूहों में सभी प्रकार की निःशक्तता ग्रामीण से नगरीय क्षेत्र में कम है। इस समूह में सर्वाधिक निःशक्तता चलने-फिरने से संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों में 10.2 और नगरीय क्षेत्रों में 7.4 प्रति हजार है। आँखों से संबंधित निःशक्तता अनुसूचित जाति समूहों में ग्रामीण क्षेत्र में 8.9 और नगरीय क्षेत्र में 6.0 प्रति हजार है। उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति समूहों में आँखों से संबंधित समस्या नगरीय क्षेत्रों में कुल जनसंख्या से कम है। आँखों से संबंधित निःशक्तता कुल जनसंख्या में 7.7 प्रति हजार है।
ज्ंइसमरू3ए ब्ीींजजपेहंती रू क्पेंइसमक च्वचनसंजपवद पद ैबीमकनसमक ब्ंेजमे ए2001
ज्लचम व िक्पेंइपसपजल च्मत ज्ीवनेंदक च्वचनसंजपवद
ज्वजंस त्नतंस न्तइंद डंसम थ्मउंसम
प्द ैममपदह 8ण्6 8ण्9 6 8ण्8 8ण्1
प्द ैचममबी 1ण्5 1ण्6 1ण्3 1ण्7 1ण्4
प्द भ्मंतपदह 2ण्1 2ण्4 1ण्1 2ण्2 1ण्9
प्द डवअमउमदज 9ण्6 10ण्2 7ण्4 11ण्4 7ण्8
डमदजमस 2ण्3 2ण्4 2ण्2 2ण्6 2ण्1
ज्वजंस 24ण्1 25ण्4 19ण्5 26ण्7 21ण्5
ज्ंइसमरू 4ए ब्ीींजजपेहंती रूक्पेंइसमक च्वचनसंजपवद पद ैबीमकनसमक ज्तपइमे ए2001
ज्लचम व िक्पेंइपसपजल च्मत ज्ीवनेंदक च्वचनसंजपवद
ज्वजंस त्नतंस न्तइंद डंसम थ्मउंसम
प्द ैममपदह 7ण्1 7ण्1 7ण्5 7ण्4 6ण्8
प्द ैचममबी 1ण्4 1ण्4 1ण्1 1ण्5 1ण्3
प्द भ्मंतपदह 1ण्5 1ण्5 0ण्7 1ण्6 1ण्3
प्द डवअमउमदज 6ण्1 6ण्1 6 7 5ण्2
डमदजमस 1ण्7 1ण्7 1ण्8 1ण्8 1ण्6
ज्वजंस 17ण्8 17ण्9 17ण्1 19ण्4 16ण्3
अनुसूचित जनजाति समूहों में आंखों से संबंधित निःशक्तता ग्रामीण से नगरीय में अधिक है। यह निःशक्तता नगरीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति समूहों में 7.5 प्रति हजार है। अनुसूचित जनजाति समूहों में सभी प्रकार की निःशक्तता ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति समूहों से कम है। किन्तु नगरीय क्षेत्रों में आंखों से संबंधित निःशक्तता अनुसूचित जातियों से अधिक है। यह निःशक्तता नगरीय क्षेत्रों में अनुसूचित जाति समूहों में 7.1 और अनुसूचित जनजाति समूह में 7.5 प्रति हजार है। नगरीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति समूहों में आंखों से संबंधित निःशक्तता कुल जनसंख्या से अधिक है। यह निःशक्तता सामान्य जनसंख्या में 7.7 प्रति हजार है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति दोनों समूहों में सभी प्रकार की निःशक्तता पुरूषों से महिलाओं में कम है। अनुसूचित जाति समूहों में चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता 11.4 प्रति हजार है जबकि कुल जनसंख्या में यह 7.5 प्रति हजार है।
निःशक्त जनसंख्या में साक्षरता
निःशक्त जनसख्या में साक्षर जनसंख्या 48.1ः है । जबकि छत्तीसगढ़ में कुंल जनसंख्या का 53.6ः जनसंख्या साक्षर है । निःशक्त पुरुष जनसंख्या में से 60.0ः एवं निःशक्त महिला जनसंख्या में से 33.0ः साक्षर है जबकि कुल जनसंख्या में यह प्रतिशत पुरुषों में 64.1ःः और महिलाओं में 43.1ः है । ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में निःशक्त जनसंख्या में साक्षर क्रमशः 44.8ः एंव 63.0ः है ।
छत्तीसगढ़ में निरक्षर जनसंख्या से साक्षर जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है। 2001 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ मंे निःशक्त जनसंख्या निरक्षर में 22.6 और साक्षर में 18.1 प्रति हजार है। चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता को छोड़ सभी प्रकार की निःशक्तता साक्षर लोगों से निरक्षर लोगों में अधिक है। चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता साक्षर जनसंख्या में 7.6 और निरक्षर में 6.8 प्रति हजार है। देखने से संबंधित निःशक्तता साक्षर में 1.2 और निरक्षर में 2.1 प्रति हजार है। मानसिक निःशक्तता साक्षर (1.4 प्रति हजार) से निरक्षर जनसंख्या (2.9 प्रति हजार) में दोगुना है। बोलने से संबंधित निःशक्तता भी साक्षर (0.9 प्रति हजार) से निरक्षर (2.1 प्रति हजार) में दोगुने से अधिक है। कानों से संबंधित निःशक्तता भी साक्षर (1.2 प्रति हजार) से निरक्षर जनसंख्या (2.1 प्रति हजार) में अधिक है। अतः मानसिक, बोलने और सुनने तीनों से संबंधित निःशक्तता साक्षर जनसंख्या से निरक्षर जनसंख्या में दोगुना है।
ज्ंइसमरू5ए ब्ीींजजपेहंती रू क्पेंइसमक च्वचनसंजपवद इल स्पमतंबल ैजंजनेए 2001
ज्लचम व िक्पेंइपसपजल च्मत ज्ीवनेंदक च्वचनसंजपवद
स्पजमतंजमे प्ससपजमतंजमे
ज्वजंस त्नतंस न्तइंद ज्वजंस त्नतंस न्तइंद
प्द ैममपदह 6ण्8 6ण्7 7 8ण्7 8ण्8 8
प्द ैचममबी 0ण्9 1 0ण्9 2ण्1 2ण्1 2
प्द भ्मंतपदह 1ण्2 1ण्4 0ण्7 2ण्1 2ण्2 1ण्2
प्द डवअमउमदज 7ण्6 8ण्1 6ण्2 6ण्8 7 6ण्3
डमदजमस 1ण्4 1ण्4 1ण्5 2ण्9 2ण्7 3ण्9
ज्वजंस 18ण्1 18ण्7 16ण्3 22ण्6 22ण्7 21ण्5
साक्षर जनसंख्या में निःशक्तता आँख और मानसिक निःशक्तता ग्रामीण से नगरीय में अधिक है। आंखों से संबंधित निःशक्तता साक्षर जनसंख्या में ग्रामीण क्षेत्र में 6.7 और नगरीय क्षेत्र में 7.0 प्रति हजार है। इसी प्रकार मानसिक निःशक्तता ग्रामीण क्षेत्र में 1.4 और नगरीय क्षेत्र में 1.5 प्रति हजार है। निरक्षर जनसंख्या में मानसिक निःशक्तता को छोड़ सभी प्रकार की निःशक्तता ग्रामीण से नगरीय में कम है। मानसिक निःशक्तता निरक्षर जनसंख्या में ग्रामीण क्षेत्र में 3.3 और नगरीय क्षेत्र में 3.9 प्रति हजार है।
पुरूषों में चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता साक्षर (9.0 प्रति हजार) से निरक्षर (7.5 प्रति हजार) में कम है। शेष पांचों प्रकार की निःशक्तता साक्षर से निरक्षर में अधिक है। आंखों से संबंधित निःशक्तता साक्षर में 7.5 और निरक्षर में 9.0 प्रति हजार है। किन्तु स्त्रियों में सभी प्रकार की निःशक्तता साक्षर से निरक्षर में अधिक है। स्त्रियों में आंखों से संबंधित निःशक्तता साक्षर में 5.8 और निरक्षर में 8.5 प्रति हजार है। इसी प्रकार चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता साक्षर में 5.5 और निरक्षर में 6.4 प्रति हजार है।
छत्तीसगढ़ के सभी 16 जिलों में निरक्षर से साक्षर जनसंख्या में निःशक्तता कम है। निःशक्त जनसंख्या साक्षर में जशपुर (12.5 प्रति हजार), बस्तर (14.4 प्रति हजार), महासमुन्द (14.7 प्रति हजार) और कोरिया (14.9 प्रति हजार) जिलों में 15.0 प्रति हजार से कम है। निःशक्त जनसंख्या निरक्षर जनसंख्या में इन्हीं जिलों में क्रमशः 18.4,18.0,22.0 और 22.0 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या साक्षर जनसंख्या के अन्तर्गत रायपुर (20.7 प्रति हजार), कवर्धा (20.9 प्रति हजार ), दुर्ग (20.3 प्रति हजार ) और धमतरी (19.9 प्रति हजार ) जिलों में 20.0 प्रति हजार से अधिक है। जबकि इन्हीं जिलों में निरक्षर जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या क्रमशः 27.6,22.0,27.1 और 26.3 प्रति हजार है। उल्लेखनीय है कि निरक्षर जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या कांकेर जिले में सर्वाधिक 30.6 प्रति हजार है। यह निःशक्त जनसंख्या राज्य के पांच जिलों - कांकेर (30.6 प्रति हजार) राजनांदगांव (26.2 प्रति हजार), महासमुन्द (26.3 प्रति हजार), दुर्ग (27.1 प्रति हजार) और रायपुर (27.6 प्रति हजार) में 25.0 प्रति हजार से अधिक है।
निःशक्त जनसंख्या साक्षर एवं निरक्षर जनसंख्या में अंतर सबसे कम दंतेवाड़ा जिला में 0.3 और सबसे अधिक कांकेर जिला में 12.6 प्रति हजार है। दंतेवाड़ा जिला में निःशक्त जनसंख्या साक्षर में 15.8 और निरक्षर में 16.1 प्रति हजार है। कांकेर जिला में निःशक्त जनसंख्या साक्षर में 18.0 और निरक्षर में 30.6 प्रति हजार है। इसके विपरीत कवर्धा जिले में साक्षर (20.0 प्रति हजार) और निरक्षर (22.0 प्रति हजार) में निःशक्त जनसंख्या में अन्तर कम है। उल्लेखनीय है कि कवर्धा जिले में साक्षर और निरक्षर दोनों में निःशक्त जनसंख्या अधिक और दंतेवाड़ा में दोनों ही कम है। ग्रामीण क्षेत्र में चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता साक्षर (8.1 प्रति हजार) से निरक्षर (7.0 प्रति हजार) में कम है।
विभिन्न व्यवसायों में निःशक्त जनसंख्या
छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या में 35.1ः जनसंख्या कार्यशील है । जबकि सम्पूर्ण जनसंख्या में 46.5ः जनसंख्या कार्यशील है । निःशक्त जनसंख्या में 43.9ः कृषक 30.1ः कृषि श्रमिक, 2.4ः गृह उद्योग एवं 23.6ः अन्य कार्यो में संलग्न है । छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या की तुलना में निःशक्त जनसंख्या में कृषक एंव गृह उद्योग एवं अन्य कर्मियों का प्रतिशत कम है । किन्तु कृषि श्रमिकों का प्रतिशत अधिक है । छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या में 49.5ः कृषक, 22.0ः कृषि श्रमिक, 2.2ः गृह उद्योग एवं 26.3ः अन्य कर्मी है ।
निःशक्त जनसंख्या कार्यशील जनसंख्या (15.2 प्रति हजार) से अकार्यशील (24.4 प्रति हजार) जनसंख्या में अधिक है। चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता कुल कार्यशील जनसंख्या (4.3 प्रति हजार) और अकार्यशील जनसंख्या (9.3 प्रति हजार) में अन्तर अधिक है। मानसिक निःशक्तता में भी कुल कार्यशील (1.0 प्रति हजार) और अकार्यशील (3.0 प्रति हजार) में अन्तर अधिक है। आंखों से संबंधित निःशक्त जनसंख्या कार्यशील जनसंख्या में 6.9 और अकार्यशील जनसंख्या में 8.3 प्रति हजार है। निःशक्त जनसंख्या विभिन्न व्यवसायों में भिन्न-भिन्न है। यह अनुपात कृषकों (15.0 प्रति हजार) और कृषि श्रमिकों (14.3 प्रति हजार) से गृह उद्योग (17.9 प्रति हजार) और अन्य कर्मियों (16.8 प्रति हजार) में अधिक है। चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता को छोड़ सभी प्रकार की निःशक्तता कृषकों में अधिक है। कृषकों में आंख से संबंधित निःशक्तता 9.7 प्रति हजार, बोलने से संबंधित निःशक्तता 1.6 प्रति हजार, सुनने से संबंधित निःशक्तता 2.9 प्रति हजार और मानसिक निःशक्तता 1.4 प्रति हजार है।
ज्ंइसमरू6ए ब्ीींजजपेहंती रू क्पेंइसमक च्वचनसंजपवद इल म्बवदवउपब ैजंजने ए2001
ज्लचम व िक्पेंइपसपजल च्मत ज्ीवनेंदक च्वचनसंजपवद
ज्वजंस ॅवतामते ब्नसजपअंजवते ।हतपबनसजनतंस स्ंइवनतमते भ्वनेमीवसक प्दकनेजतपमे व्जीमते छवद.ॅवतामते
प्द ैममपदह 6ण्9 9ण्7 6ण्3 7 7ण्8 8ण्3
प्द ैचममबी 1ण्2 1ण्6 1ण्4 1ण्3 0ण्9 1ण्7
प्द भ्मंतपदह 1ण्7 2ण्9 1ण्7 2ण्1 1ण्1 1ण्6
प्द डवअमउमदज 4ण्3 5ण्3 3ण्8 6ण्3 6ण्2 9ण्8
डमदजमस 1 1ण्4 1ण्1 1 0ण्8 3
ज्वजंस 15ण्2 15 14ण्3 17ण्9 16ण्8 24ण्4
चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता गृह उद्योग में 6.3 प्रति हजार और अन्य कार्यों में 6.2 प्रति हजार है। इसके विपरीत आंखों से संबंधित निःशक्तता (6.3 प्रति हजार) एवं चलने-फिरने से संबंधित निःशक्तता (3.8 प्रति हजार) कृषि श्रमिकों में सबसे कम है। जबकि बोलने, सुनने और मानसिक निःशक्तता अन्य कार्यों में सबसे कम है।
छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में कार्यशील जनसंख्या से अकार्यशील जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या अधिक है। कार्यशील में निःशक्त जनसंख्या कांकेर जिले में सर्वाधिक 19.7 प्रति हजार है। यह रायपुर जिले में 19.1, दुर्ग जिले में 17.4, राजनांदगांव जिले में 16.6 और धमतरी जिले में 16.4 प्रति हजार है। इन्हीं जिलों में निःशक्त जनसंख्या अकार्यशील जनसंख्या में कांकेर एवं रायपुर जिले (29.1 प्रति हजार), धमतरी जिले (28.2 प्रति हजार), राजनांदगांव जिले (27.2 प्रति हजार), और दुर्ग जिले (26.6 प्रति हजार) में 25.0 प्रति हजार से अधिक है। इसके विपरीत जशपुर (11.4 प्रति हजार), महासमुन्द (11.7 प्रति हजार), जांजगीर-चांपा (12.4 प्रति हजार), रायगढ़ (12.4 प्रति हजार), कोरबा एवं बस्तर (13.2 प्रति हजार) और दंतेवाड़ा (13.8 प्रति हजार) जिलों में 14.0 प्रति हजार से कम है।
कार्यशील और अकार्यशील जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या में सबसे अधिक अंतर धमतरी और कवर्धा जिले में 11.8 प्रति हजार है। धमतरी जिले में कार्यशील (11.7 प्रति हजार) से अकार्यशील जनसंख्या (23.4 प्रति हजार) में निःशक्त जनसंख्या दोगुना है। महासमुन्द जिले में यह अन्तर 11.7, जांजगीर-चांपा जिले में 11.1, रायगढ़ जिले में 11.0 और राजनांदगांव जिले में 10.6 प्रति हजार है। कार्यशील और अकार्यशील जनसंख्या के अन्तर्गत निःशक्त जनसंख्या में सबसे कम अन्तर दंतेवाड़ा जिला में 4.8 प्रति हजार है। कार्यशील और अकार्यशील जनसंख्या के अन्तर्गत निःशक्त जनसंख्या में अन्तर कोरबा जिले में 6.4, कोरिया जिले में 7.0, बस्तर जिले में 7.3 और रायपुर जिले में 7.9 प्रति हजार है।
कृषक
छत्तीसगढ़ के जिलों मे कृषकों में निःशक्त जनसंख्या अधिक है। कृषकों में निःशक्त जनसंख्या सर्वाधिक रायपुर जिले में 20.6 प्रति हजार और सबसे कम रायगढ़ में 10.6 प्रति हजार है। कृषकों में निःशक्त जनसंख्या कांकेर जिले में 18.2, दुर्ग जिले में 17.0, राजनांदगांव जिले में 16.1, बिलासपुर एवं धमतरी जिले में 16.0 प्रति हजार है। इसके विपरीत यह निःशक्तता जशपुर जिले में 11.3, महासमुन्द जिले में 11.7 और दंतेवाड़ा जिला में 12.8 प्रति हजार है।
कृषि श्रमिक
कृषि श्रमिकों में निःशक्त जनसंख्या रायपुर जिले में सर्वाधिक 19.6 प्रति हजार और सबसे कम जशपुर जिले में 9.9 प्रति हजार है। कृषि श्रमिकों में निःशक्त जनसंख्या दुर्ग जिले में 16.5, कवर्धा और राजनांदगांव जिले में 15.9 और धमतरी जिले में 15.5 प्रति हजार है। इसके विपरीत महासमुन्द जिले में यह 10.7 प्रति हजार है।
गृह उद्योग
गृह उद्योगों में संलग्न जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या कोरिया जिले में सर्वाधिक 20.6 प्रति हजार और सबसे कम कवर्धा जिले में 11.4 प्रति हजार है। गृह उद्योगों में निःशक्त जनसंख्या कांकेर जिले में 20.2, दुर्ग जिले में 19.7, रायपुर जिले में 19.6, धमतरी जिले में 19.5, दंतेवाड़ा और सरगुजा जिलों में 19.4 प्रति हजार है। इसके विपरीत जशपुर जिले में 14.1 और जांजगीर-चांपा जिले में 14.6 प्रति हजार है।
अन्य कमी
अन्य कर्मियों में निःशक्त जनसंख्या दंतेवाड़ा जिला में सर्वाधिक 21.3 प्रति हजार और सबसे कम बस्तर जिले में 13.1 प्रति हजार है। अन्य कर्मियों में निःशक्त जनसंख्या कांकेर जिले में 19.6, धमतरी जिले में 18.8, कवर्धा एवं राजनांदगांव जिले में 18.6 और दुर्ग जिले में 18.4 प्रति हजार है। इसके विपरीत कोरबा जिले में 14.1, जांजगीर-चांपा जिले में 14.4, कोरिया जिले में 14.6, रायगढ़ एवं महासमुन्द जिले में 14.7 प्रति हजार है।
कार्यशील और अकार्यशील दोनों ही जनसंख्या में निःशक्त जनसंख्या पुरुषों से महिलाओं में कम है । इसी तरह कृषकों तथा गृह उद्योगों में निःशक्त जनसंख्या पुरुषों से महिलाओं में कम है । किन्तु कृषि श्रमिकों तथा अन्य सेवाओं में निःशक्त जनसंख्या पुरुषों से महिलाओं में अधिक है । निःशक्त जनसंख्या कृषि श्रमिकों में पुरुषों में 26.9 और महिलाओं में 30.9 प्रति हजार है तथा अन्य सेवाओं में निःशक्त जनसंख्या पुरुषों में 18.6 तथा महिलाओं में 19.8 प्रति हजार है । उल्लेखनीय है कि कृषि श्रमिकों एवं अन्य कार्यो में निःशक्त जनसंख्या चलने-फिरने को छोड चारों प्रकार में पुरुषों से महिलाओं में अधिकता है । निःशक्त जनसंख्या कृषि श्रमिकों पुरुषों में देखने में 10.9 प्रति हजार, बोलनें में निःशक्त 2.7 प्रति हजार, सुनने में 3.4 तथा मानसिक 2.1 प्रति हजार है । जबकि महिलाओं में यह क्रमशः 14.6 3.0 3.8 तथा 2.5 प्रति हजार है । जबकि चलने-फिरने में निःशक्तता पुरुषों में 7.9 तथा महिलाओं में 6.9 प्रति हजार । इसी तरह अन्य कार्यो में निःशक्त जनसंख्या पुरुषों में 8.6 प्रति हजार देखने में, 0.9 प्रति हजार बोलने में, 2.9 प्रति हजार सुनने में निःशक्त है जबकि महिलाओं में यह क्रमशः 9.5, 1.2, 1.5 तथा 1.1 प्रति हजार है ।
निःशक्त जनसंख्या सभी व्यवसायों में ग्रामीण से नगरीय क्षेत्र में कम है । किन्तु कार्यशील जनसंख्या में देखने तथा चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय क्षेत्र मंे अधिक है । देखने में निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में 6.8 तथा नगरीय क्षेत्र में 7.8 प्रति हजार तथा चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में 4.2 तथा नगरीय क्षेत्र में 5.0 प्रति हजार है । इसी तरह कृषि श्रमिकों में देखने में तथा चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण से नगरीय क्षेत्र में अधिक है । देखने में निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में 8.6 तथा नगरीय क्षेत्र में 9.4 प्रति हजार तथा चलने-फिरने में निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में 4.7 तथा नगरीय क्षेत्र में 4.9 प्रति हजार है ।
निष्कर्ष
सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या 20.1 प्रति हजार है जो सम्पूर्ण भारत के निःशक्त जनसंख्या 20.3 प्रति हजार से कम है । छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक निःशक्त जनसंख्या चलने-फिरने में निःशक्त है । तत्पश्चात देखने से संबंधित निःशक्तता का स्थान है । जबकि सम्पूर्ण भारत में सर्वाधिक निःशक्त जनसंख्या देखने से संबंधित (10.4 प्रति हजार) है । तत्पश्चात चलने-फिरने की निःशक्तता का द्वितीय स्थान है । सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में निःशक्त जनसंख्या पुरुषों से महिलाओं में दो-तिहाई है । निःशक्त जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम है । कृषकों से कृषि श्रमिकों में निःशक्त जनसंख्या कम है । इसी तरह निःशक्त जनसंख्या निरक्षर से साक्षर में कम है । अनुसूचित जातियों से अनुसूचित जनजातियों में निःशक्त जनसंख्या तीन-चैथाई है । छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक निःशक्त जनसंख्या रायपुर जिले में और सबसे कम जशपुर जिले में है ।
इस जनगणना में विकलांगों की सही और सम्पूर्ण जानकारी संकलित करने के लिए जनसामान्य में जागरुकता लाने के उदृेश्य से 5 फरवरी 2011 को राज्य के सभी जिलों एवं तहसील मुख्यालयों में विकलांगता रैली का आयोजन किया गया । विकलांगता रैली के आयोजन में राज्य के समाज कल्याण विभाग, आदिम कल्याण विभाग, जिला प्रशासन एवं विकलांगता क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों का सराहनीय योगदान रहा । शासकीय और अन्य ऐजेन्सी जो कि निःशक्ततों की भलाई और सशक्तीकरण के कार्य में संलग्न है, वे एक माध्यम के रूप से विस्तृत जाॅच में सहयोग देगंे ।
lanHkZ&lwph
1. Census of India (2001): Census of India, Disabled Population, Table C2-24, Registrar General of India, New Delhi.
2. Census of India (2011): Final Tables of Population, Chhattisgarh, Series 23, Director, Census office, Chhattisgarh.
3. Ghai, Anita (2008): (Dis)embodied Form, Issues of Disabled Women, Shakti Books, New Delhi.
4. Harris, White, Barbara (2003): Poverty and Disability with Special Reference to Rural South Asia, last accessed on Junuary 28, 2008, Manchester.
5. Jeffery, Roger and Nidhi Singal (2008): “Measuring Disability in India”, Economic and Political Weekly, March 22, 2008, pp. 22-24.
6. Klasing, I (2007): Disability and Social Exclusion in Rural India, Rawat Publications, New Delhi.
7. Lamichhane, P. R. (2008): “Socio-economic Characteristics of Disables in Mahesh VDC of Bera District of Nepal Tarai”, National Geographer, Vol. XLIII, Nos. 1 and 2, pp. 111-121.
8. Mehrotra, Nilika (2004): “Women, Disability and Social Support in Rural Haryana”, Economic and Political Weekly, 39,52, pp 5640-44.
9. Mitra, S. and U. Sambamoortni (2006): “Disability Estimates in India: What the Census and NSS Tell US”, Economic and Political Weekly, 41, 38, pp. 4022-26.
10. World Bank (2007): People with Disabilities in India: From Commitments to outcomes, Human Development Unit, South Asia Region, The World Bank, New Delhi.
Received on 19.09.2011
Accepted on 12.10.2011
© A&V Publication all right reserved
Research J. Humanities and Social Sciences. 2(4): Oct.-Dec., 2011, 201-208